असरानी: एक अद्वितीय अभिनेता की यात्रा
12 मिनट पहले लेखक: अभय पांडेय
असरानी का जन्म 1 जनवरी 1941 को राजस्थान के जयपुर में एक सिंधी परिवार में हुआ। वह एक ऐसे अभिनेता थे, जिनका नाम सुनते ही चेहरे पर मुस्कान आ जाती थी। उनकी फिल्मों जैसे ‘शोले’, ‘चुपके चुपके’, ‘धमाल’, और ‘खट्टा मीठा’ में निभाए गए किरदार आज भी दर्शकों के दिलों में बसे हुए हैं।
जयपुर में एक नॉन-फिल्मी परिवार में जन्मे असरानी ने मुंबई आकर फिल्मों में अपनी पहचान बनाने की कोशिश की। लेकिन यह सफर आसान नहीं था। उन्होंने संघर्ष, ट्रेनिंग, और मेहनत के दम पर हिंदी सिनेमा में अपनी अलग छाप छोड़ी। आज, उनकी 85वीं बर्थ एनिवर्सरी के अवसर पर, आइए उनकी जिंदगी से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण किस्सों पर प्रकाश डालते हैं।
शिक्षा और प्रारंभिक संघर्ष
असरानी का असली नाम गोवर्धन असरानी था। उनके पिता जयपुर में एक कार्पेट की दुकान चलाते थे और परिवार चाहता था कि वह भी उनके व्यवसाय को संभालें। लेकिन असरानी का मन हमेशा फिल्मों और एक्टिंग में लगता था। उन्होंने जयपुर के राजस्थान कॉलेज से ग्रेजुएशन किया। कॉलेज के दिनों में, उन्होंने ऑल इंडिया रेडियो में वॉयस आर्टिस्ट के तौर पर काम किया ताकि अपने खर्च को चला सकें।
असरानी ने डीडी नेशनल को दिए एक इंटरव्यू में बताया कि कॉलेज के दिनों में उनकी तस्वीरें कॉलेज की मैगजीन में छपती थीं। वह कॉलेज के स्टेज प्ले और रेडियो में बच्चों के प्रोग्राम में भाग लेते थे। उनके पड़ोसी और रिश्तेदार उन्हें एक अच्छे अभिनेता के रूप में पहचानते थे। इसी प्रशंसा ने उन्हें फिल्मों में करियर बनाने का हौसला दिया।
मुंबई की चमक और संघर्ष
जयपुर में असरानी के मोहल्ले के एक चाचा के रिश्तेदार मशहूर म्यूजिक डायरेक्टर नौशाद अली थे। चाचा ने नौशाद को एक चिट्ठी लिखी, जिसमें बताया गया था कि असरानी की आवाज अच्छी है और वह कॉमेडी भी कर सकते हैं।
मैट्रिक की पढ़ाई पूरी करने के बाद, असरानी चिट्ठी लेकर मुंबई पहुंचे। उन्हें लगा कि नौशाद साहब का नाम होने से काम आसानी से मिल जाएगा। लेकिन मुंबई पहुंचकर उन्हें असली जिंदगी की कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। एक महीने तक नौशाद का पता ढूंढते-ढूंढते, जब वह उनके बंगले तक पहुंचे, तो वहां के वॉचमैन ने कहा कि नौशाद साहब बहुत बिजी हैं और उन्हें एक महीने बाद आने के लिए कहा।
FTII में अभिनय की बारीकियां सीखना
असरानी ने एक साल तक काम ढूंढते-ढूंढते थक हारकर जयपुर लौट आए। घरवालों ने उन्हें कार्पेट की दुकान संभालने का सुझाव दिया। लेकिन असरानी ने हार नहीं मानी। कुछ समय बाद उन्हें पता चला कि पुणे में फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (FTII) में एक प्रोफेशनल एक्टिंग कोर्स शुरू हो रहा है। उन्होंने इस कोर्स में दाखिला लिया और वहां अभिनय की बारीकियां सीखी।
कोर्स खत्म होने के बाद भी उन्हें काम नहीं मिला। कई बार वह ऑडिशन देते और प्रोडक्शन ऑफिसों के चक्कर लगाते रहे। इस दौरान उन्हें कुछ छोटे रोल मिले, लेकिन स्थायी काम नहीं मिला। अभिनेता बनने की इच्छा और संघर्ष के बीच, वह लगातार प्रयास करते रहे।
इंदिरा गांधी से शिकायत का असर
एक दिन इंदिरा गांधी पुणे आईं। उस समय वह सूचना और प्रसारण मंत्री थीं। असरानी ने अपने साथियों के साथ उनसे शिकायत की कि सर्टिफिकेट होने के बावजूद उन्हें काम नहीं मिल रहा। इंदिरा गांधी ने उनकी बात ध्यान से सुनी और मुंबई आकर प्रोड्यूसर्स से कहा कि FTII के ट्रेंड कलाकारों को मौका दिया जाए। इस बातचीत के बाद असरानी को जया भादुरी के साथ फिल्म गुड्डी में काम करने का मौका मिला।
शोले और अन्य चर्चित फिल्में
असरानी ने अपने करियर में 300 से ज्यादा फिल्मों में काम किया, जिनमें से फिल्म ‘शोले’ उनकी सबसे चर्चित फिल्मों में से एक है। इस फिल्म में उन्होंने जेलर का किरदार निभाया। असरानी ने बताया कि इस रोल के लिए उन्होंने काफी तैयारी की थी।
फिल्म ‘शोले’ के शूटिंग के दौरान एक समय ऐसा भी आया जब उनका सीन काट दिया गया था। लेकिन बाद में इस सीन को फिर से जोड़ा गया और यह किरदार हिंदी सिनेमा के सबसे यादगार रोल्स में से एक बन गया।
जया बच्चन की शादी में भाई का रोल
असरानी और जया बच्चन ने कई फिल्मों में साथ काम किया, लेकिन उनका रिश्ता सिर्फ सह-कलाकारों तक सीमित नहीं था। वह FTII में जया के शिक्षक थे और जया को एक्टिंग की बारीकियां सिखाते थे। जया और अमिताभ की शादी में असरानी दुल्हन के चार भाइयों में से एक बने।
असरानी की अंतिम फिल्म
आज, असरानी की बर्थ एनिवर्सरी के दिन उनकी एक और फिल्म इक्कीस रिलीज हो रही है, जिसमें दिवंगत धर्मेंद्र भी नजर आएंगे। यह धर्मेंद्र की अंतिम फिल्म है। इसके अलावा, दिवंगत असरानी निर्देशक प्रियदर्शन की आने वाली फिल्मों भूत बंगला और हैवान में भी दिखाई देंगे, जिनका 2026 में रिलीज होने की उम्मीद है।
असरानी की कहानी हमें यह सिखाती है कि संघर्ष और मेहनत से ही सफलता की सीढ़ी चढ़ी जा सकती है। उनका जीवन एक प्रेरणा है उन सभी के लिए जो अपने सपनों को साकार करने के लिए मेहनत कर रहे हैं।
